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Ganit kaise sikhe. गणित कैसे सीखे

गणित कैसे सीखें?

इन 45 सालों के शिक्षकता के अनुभव से  मैं इतना अवश्य बोल सकता हूं कि गणित कोई भी सीख सकता है| प्रत्येक मनुष्य का दिमाग गणित सीखने के  लिए पर्याप्त मात्रा में सक्षम है| केवल गणित सीखने की प्रक्रिया, अन्य विषय को सीखने की प्रक्रिया से अलग है- इस तथ्य को गणित सीखने के क्रम में याद रखना आवश्यक है|

गणित सीखने में प्रॉब्लम क्या होता है?

गणित के 2 स्तंभ होते  हैं:-

1. कैलकुलेशन

2.गणित के कंसेप्ट

 जिनको भी गणित सीखने में प्रॉब्लम हो रहा है उन्हें पहले तय करना होगा कि उनका सबसे ज्यादा प्रॉब्लम कहां हो रहा है–  जिन्हें गणित के कैलकुलेशन करने में प्रॉब्लम प्रखर है तो इससे यह अर्थ निकाला जाना चाहिए कि गणित के बेसिक को और बेहतर करना आवश्यक है|

 अगर गणित के सवाल देख कर समझ में नहीं आता क्या कि करना क्या है?– तो इसका अर्थ है की गणित के सवाल को समीकरण में कैसे बदला जाता है उसका समुचित ज्ञान नहीं होना|  यह एक अलग समस्या है जिसका समाधान भी बहुत आसान होता है एवं इससे अत्यंत शीघ्रता से पाया जा सकता है| ध्यान देना आवश्यक है कि अंक गणित के 80% से ज्यादा सवाल समीकरण के माध्यम से हल होता है एवं समीकरण अत्यंत सहज तरीके से सीखा जा सकता है| मगर किसी सवाल को पढ़कर सही समीकरण को बनाना—  यह एक अलग प्रक्रिया है|  जिन्हें गणित के सवाल पर कर समझ में नहीं आता है कि करना क्या है—- उनको असल में सवाल पर कर उसे समीकरण में  परिवर्तित करना नहीं आता है|

गणित में तेज तरार कैसे बने?

 बहुत ही आसान है|  पहले अपने कमियों का सटीक मूल्यांकन करना होगा|  सटीक मूल्यांकन के बाद ही कोई अपने अंदर गणित संबंधित कमियों को दूर कर पाएगा|  जैसा कि पहले मैंने बताया है कि मोटे तौर पर गणित के दो ही प्रकार के कमियां कमजोर छात्र में होता है जैसे कैलकुलेशन की समस्या या गणित देखकर समझ में नहीं आना कि करना क्या है?  जैसे ही इन दोनों समस्या का हल कोई कर लेता है तो वह स्वाभाविक रूप से गणित में तेज तरार हो जाता है|

कोचिंग जाता हूं मगर कोई फायदा नहीं हो रहा है

यह भी एक आम समस्या है| क्लास में सर जो पढ़ाते हैं आपको सही तरीके से नहीं आता है और इसका कारण आपकी  बेसिक पार्ट में कमी होने के कारण होता है|  क्लास में बहुत सारे बच्चे होते हैं जिसके कारण सर के लिए संभव नहीं होता है कि सारे बच्चों पर  बराबर नजर रख सके| मगर इस समस्या का समाधान भी बहुत आसान है| आपको आगे आकर सर से इतना पूछना है कि सर अगले क्लास में किस चैप्टर को पढ़ाने वाले हैं और उस चैप्टर के लिए किन-किन बेसिक का ज्ञान होना अत्यावश्यक है| सर आपको बता देंगे और आप उन बेसिक पॉइंट्स की तैयारी चैप्टर शुरू होने के पहले खुद से अगर कर लेते हैं तो सर का पढ़ाया हुआ आपको सब समझ में आने लगेगा|

गणित कैसे समझे?

अगर गणित कोई समझ नहीं पा रहा है— इसका मतलब वह गणित में कमजोर है– यह अवधारणा ही गलत है|  गणित नहीं समझ पाने का मतलब  है कि दिमाग में उस तथ्य पर सही आकृति का नहीं होना| कई बार ऐसा होता है कि आप किसी को देखकर पहचान नहीं पाते— नाम नहीं याद आता है—- और यह स्थिति तब अक्सर होता है जब आप बहुत दिन के बाद उस व्यक्ति से मिलते हैं| उसी तरह अगर समय पर  रिवीजन नहीं किया जाए तो क्या हुआ  मैथ भी समझ में नहीं आता है। अबे दूसरा उदाहरण से वस्तुस्थिति को समझाने का कोशिश करता हूं— मान लीजिए आपने एक रेंगने वाले प्राणी को देखा जिसे आपने कभी भी नहीं देखा होगा भले ही वह प्राणी अफ्रीका के जंगल के अंदर पाया जाता है तो क्या आप उसे पहचान पाएंगे|  जवाब आपका ना  होगा| इसी  तरह आप उस गणित को कर ही नहीं सकते हैं जिसका आपके पास अर्थात आपके दिमाग के बारे पूर्वाभास नहीं होता है| अर्थात यहां गणित में कमजोर याद इस तरह का सवाल नहीं है- क्योंकि दिमाग के पास ना कोई अनुभव है ना कोई पूर्वाभास है| अगर मान भी लिया जाए की गणित में किसी का दिमाग कम चलता है तो इसका मतलब सिर्फ इतना होता है की उस कमजोर दिमाग वाले उन वस्तुओं से अर्थात उन गणित से दिमाग को ज्यादा परिचय करवा दिया जाए एवं परिचय बार-बार करवाया जाए| अर्थात गणित सीखना या गणित समझना केवल इस एक  आशय या मुद्दे पर खड़ा है कि वह कमजोर छात्र को जिन  गणितों से  प्रॉब्लम है  उन  गणितो को अपने दिमाग के सम्मुख बार बार पेश करें अर्थात Revision करें। मैंने देखा है, यह एक अत्यंत कारगर उपाय है।

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